Sunday, October 31, 2010

शे(अ)रो शायरी, भाग-७ : वो लब कि जैसे सागर-ए-सहबा दिखाई दे

शे(अ)रो शायरी, भाग-७ : वो लब कि जैसे सागर-ए-सहबा दिखाई दे हे लेखन येथे वाचा.

2 comments:

  1. विभाग ◌:◌ गद्य लेखन
    लेखन ◌:◌ शे(अ)रो शायरी, भाग-७ : वो लब कि जैसे सागर-ए-सहबा दिखाई दे
    लेखनाचा दुवा ◌:◌ http://www.manogat.com/node/20960
    प्रकाशन ◌:◌ ३१|१०|१०-१५:५३
    लेखक ◌:◌ मानस६
    विभाग ◌:◌ गद्य लेखन

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  2. लेखन ◌:◌ शे(अ)रो शायरी, भाग-७ : वो ...
    लेखनाचा दुवा ◌:◌ http://www.manogat.com/node/20960
    प्रतिसाद ◌:◌ आवडलं
    प्रतिसादाचा दुवा ◌:◌ http://www.manogat.com/node/20960#comment-179395
    प्रकाशन ◌:◌ ३१|१०|१०-१७:२४
    लेखक ◌:◌ मिलिंद फणसे
    विभाग ◌:◌ गद्य लेखन

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